समय का आख़री दरवाज़ा
by Vaibhav Ahuja
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Book Details
- Language: Hindi
- Published Date: 24-10-2026
- Flipbook Pages: 100
Book Summary
जब दुनिया के स्वचालित निगरानी तंत्रों ने इस असंभव घटना को दर्ज किया, तब तक पृथ्वी पर कोई ऐसा व्यक्ति नहीं बचा था जो बता सके कि वास्तव में क्या हुआ था। कोई नहीं—सिवाय एलेक्स वॉकर के। वह एक ऐसे कक्ष में जागा, जो पृथ्वी की सतह से लगभग आठ सौ मीटर नीचे स्थित था। उसके आसपास आधुनिक वैज्ञानिक उपकरण लगे थे। दीवारों पर अनगिनत संख्याएँ चमक रही थीं। एक विशाल स्क्रीन पर समय, ऊर्जा और अंतरिक्ष से संबंधित ऐसे आँकड़े दिखाई दे रहे थे, जिनका अर्थ वह स्वयं भी पूरी तरह नहीं समझ पा रहा था। उसे अपना नाम याद था, अपना अतीत भी—लेकिन उन घटनाओं का क्रम नहीं, जो उसे उस स्थान तक लेकर आया था। फिर स्क्रीन पर एक संदेश उभरा— “तुम्हें यहाँ नहीं होना चाहिए था।” कुछ ही क्षण बाद एक आवाज़ उसके भीतर गूँजी। वह आवाज़ किसी बाहरी यंत्र से नहीं आ रही थी। वह सीधे उसके मस्तिष्क में सुनाई दे रही थी। लेकिन सबसे भयावह बात यह नहीं थी कि कोई उससे संपर्क कर रहा था। सबसे भयावह बात यह थी कि उस भूमिगत प्रयोगशाला के अभिलेखों के अनुसार, एलेक्स वॉकर की मृत्यु तीन दिन पहले हो चुकी थी। वह जीवित कैसे था? मानवता कहाँ चली गई थी? इन प्रश्नों के उत्तर खोजते हुए वह एक ऐसे रहस्य के निकट पहुँचने वाला था, जहाँ विज्ञान की स्थापित धारणाएँ अपर्याप्त सिद्ध होने लगती हैं। समय केवल बीतने वाली अवधि नहीं रह जाता, बल्कि एक ऐसी सीमा बन जाता है जिसे पार करने की कीमत का अनुमान लगाना भी संभव नहीं।
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